नवरा़ित्र:ः क्यो पूजा की जाती है माता चंद्रघंटा की

 या देवी सर्वभूतेषु .....

 

 


आज दिनांक 9 अक्टूबर 2021 दिन शनिवार नवरात्रि की तीसरा दिन आज माता के 9 रूपों
में तीसरा स्वरूप चन्द्रघण्टा की पूजा अर्चना की जाती है


what to do or not to do during navratri 2020 | Navratri 2020 : शक्ति की  साधना में इन 9 बातों का जरूर रखें ध्यान | Hindi News, धर्म 

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यों की जाती है -

सनातन धर्म के अनुसार नवरात्रि का तीसरा दिन तृतीया तिथि के तौरपर पर देवी दुर्गा के तीसरे
स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की जाती है।
नवरात्रि के इस दिन में दुर्गा.उपासना पूजा का अत्याधिक महत्व है।

मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन
माता के इसी स्वरूप का साधक उपासना व पूजा करते है।
बाघ पर सवार मॉं चन्द्रघ्ंाटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान प्रकाशमय है । मस्तक पर अर्धचन्द्र विराजमान है इस कारण माता का नाम चंद्रघंटा पडा।

माता भक्तों के कष्टों का निवारण ये शीघ्र ही कर देती हैं। इनका वाहन सिंह है अतः
इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है।


माता के उपासना से माता भक्त की प्रेत बाधा से सदैव रक्षा करती है। इस दिन साधक का
मन मणिपुर चक्र में ध्यान लगाने पर उसे अलौकिक वस्तुओ के दर्शन होते है।
माता के स्वरूप की आराधना से साधक को परम शांति मिलती है व उसका कल्याण होता।

इस दिन जो भक्त माता की उपासना कर आशीर्वाद प्राप्त करता है वह जहां भी होता है उसे देखकर
लोग शांति का अनुभव करते हैं तथा साधक के शरीर से सदैव उर्जा प्रवाहित होती रहती है जिसे
लोग अनुभव करते हैं व सदैव उसकी ओर आकृष्ट होते है।  


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चंद्रघंटा माता की पूजा उपासना का फल
 --


उपासक सदैव निरोगी, सुखी और सम्पन्न होने का वरदान प्राप्त करता है। साधक में वीरता और निभर््ारता
के साथ सौम्यता का भी विकास हेाता है। तथा स्वर में दिव्य अलौकिक शक्ति का वास होता है। वह छोटी छोटी बात पर विचलित नहीं होता।

देवी की पूजा विधि एवं आराधना मंत्र


माता का शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान कराएं। व तरह के फूलएअक्षतए कुमकुम
सिन्दूरएअर्पित करें। केसर.दूध से बनी खीर का भोग लगाएं। मां को सफेद कमलएलाल
गुडहल और गुलाब की माला अर्पण करें और प्रार्थना करते हुए मंत्र जप करें।


मंत्र --

ष्या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यैए नमस्तस्यैए नमस्तस्यैए नमो नमः।

फिर माता जी की आरती करें।


Sharad Navratri 2020: Offer this Prasadam to Maa Durga every wish will be  fulfilled
साधना मे ंसावधानी:ः


1. सुद्धता का पालन करना चाहिए।
2. मन में बुरे विचारों का चिन्तन व मनन नहीं करना चाहिए
3. गलत लोगों की संगति से बचना चाहिए
4. छल कपट अपशब्दों का प्रयोग नहंी करना चाहिए।
5. ब्रम्हचर्य का पालन करना चाहिए
6. यदि कही बिमार या जरूरी संकट यात्रा की आवश्यकता पड जाती है तो माता से
क्षमा याचना कर उपवास तोड सकते है इससे क्षम्य होता है
7 स्त्रियां रजस्वला पीरेड में साधना रोक सकती है
8 पहले तो जानबूझ कर गलती नहीं करना चाहिए। यदि साधना में किसी भी प्रकार की गलती
हो जाय तो माता क्रोधित हो सकती है गलती हो जाने पर माता से क्षमा याचना कर लेना चाहिए
9 सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए, तामसिक भोजन से दूरी बना कर रखना चाहिए।

- स्वामी श्रेयानन्द महाराज
9752626564



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