जाने रामनवमी पर कन्या पूजन का महत्व और विधि -

 जाने रामनवमी पर कन्या पूजन का महत्व और विधि -


 

सनातन धर्म के मुख्य पर्वों में से जहां माता की अराधना पूजा का महत्व है वहीं राम नवमी
के पूजा का भी अपना महत्व है। इस दिन को दुर्गा महा नवमी भी कहा जाता है। यह तिथि
को शारदीय नवरात्रि की अंतिम दिवस के रूप में मनाया जाता है इस दिन मॉं के 9 वें रूप
सिद्धदात्री की पूजा की जाती है ।

इस वर्ष नवरात्रि 2021 का राम नवमी का 14 अक्टूबर 2021 को मनाया जा रहा है, तिथि
का आगे बढना या कम होना ज्योतिषीय गणना के आधार पर की जाती है अतः इस वर्ष
राम नवमी का पर्व 13 अक्टूबर 2021 की रात्रि को ही पड जायेगी। आईये देखते हैं पंचांग
क्या कहती है-

Hindu Goddess in India/World- List of Hindu Deities 

 नवमी तिथि प्रारम्भ. 13 अक्टूर 2021 को रात 08-05 बजे से
नवमी तिथि समाप्त. 14 अक्टूबर 2021 को शाम  06.50 बजे तक


Kya Ram Bhagwan tha? – Hindi-Web 

 

आज भगवान नारायण विष्णु की पूजा क्यों करें:ः 

इस बार नवरात्रि गुरूवार को पड रही है जो कि भगवान
विष्णु की आराधना का दिन है अतः भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए आज भगवान
विष्णु की पूजा आराधना करनी चाहिए। माता लक्ष्मी विष्णु के चरणों में विराजती है अतः मान्यता
है जहां भगवान विष्णु रहेंगे माता लक्ष्मी स्वयं चली आयेंगी।


Hindu Goddess in India/World- List of Hindu Deities 

रामनवमी 2021 पर कन्या पूजन का विशेष महत्व -

नवरात्रि के सभी दिवस सिद्ध दिवस के रूप में माने जाते हैं जिसमें की गई पूजा
आरधना से जल्द सफलता अर्जित होती है। नवरात्रि में सभी दिनों में कन्या की पूजा
की जाती है परन्तु नवरात्रि के दिन कन्या का पूजन और कन्या भोजन कराने से व्रत
पूजा का पूरा लाभ व पूजा की पूर्णता मानी जाती है। 

कन्या भोजन के उपरान्त कन्याओ को दक्षिणा देकर सम्मान के साथ मातृ समूह का याद कर बिदाई दी जाती है जिससे माता दुर्गा अत्यंत प्रसन्न होकर अपने भक्त की मनोकामना की पूर्णता का आशीर्वाद प्रदान करती है।


कौन करे कन्या पूजन -

जो माता की उपासना करता है चाहे उसने उपवास रखा हो या न रखा हो, या फिर पूरे
नवरात्र में सिर्फ 1, 3 या 5 दिन व्रत रखा हो उन्हें अवश्य कन्या भोजन कराना चाहिए इसके
लिए किसी प्रकार का बंधन नहीं है मातृ स्वरूप में हर कोई कन्या भोजन करा सकता है । यदि
आप घर में कन्या पूजन नहीं कर सकते तो पास के ही मंदिर में जहां माता की स्थापना की
गई हो वहां कन्या पूजन हेतु दान देकर भी इस लाभ के भागी बन सकते है।

today is ashtmi kanya poojan know ram navami time here - आज सुबह 8 से लग गई  नवमी तिथि, ऐसे करें कन्या पूजन
इस विधि से कन्या पूजन  कराने से पूर्ण मानी जाती है -

1 कन्याओं को माता का स्वरूप में माना जाता है माता का सफाई अत्यंत प्रिय है अतः
कन्याओं के आने से पहले स्थान की साफ सफाई कर लेने चाहिए

2. कन्या पूजन में बालिकाओं की उम्र सामान्यतः 2 या 3 वर्ष से लेकर 10 वर्ष के बीच हों और
बालक सामान्य 9 वर्ष की उम्र तक होना चाहिए ।

3. व्रती कन्या के आमंत्रित कर उनके पैर धुलवा कर पूजन कक्ष में उन्हें ले जाकर माता को
उनके हाथों से पुष्प अर्पित करायें फिर उनकी मानसिक पूजन कर उन्हें भोजन खिलाये।

4. माता के लिए बनाई सामग्री खीर, हलवा, पूडी, चना स्वादिष्ट भोजन कराये।

5. बिदाई के समय व्रती कन्याओं के मातृ स्वरूप भावना के साथ उनके चरणों को स्पर्श करे
 और यथाशक्ति दक्षिणा देकर विदाई करे।


बिना भैरव के कन्या पूजन सफल नही मानी जाती -

माता की पूजा बिना भैरव के पूजा के पूर्ण नहंीं मानी जाती अतः भी आप माता की पूजा
करे भैरव को स्थान अवश्य दे। इसी मान्यता के अनुरूप 9 बालिकाओ के साथ एक छोटा
बालक भैरव स्वरूप अवश्य साथ में भोजन के समय साथ में बिठाये।

- स्वामी श्रेयानन्द महाराज

शिष्य स्वामी निखिलेश्वरानन्द जी

(सनातन साधक परिवार)
मो. 9752626564









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