भाई बहन के प्रेम के बंधन का अटूट पर्व :: रक्षा बंधन
भाई बहन के प्रेम के बंधन का अटूट पर्व :: रक्षा बंधन
श्रावण की पूर्णिमा को मनाया जाना पर्व रक्षा बंधन हमारे सनातन
धर्म में वैदिक काल से चली आ रही है । इस पर्व को मनाने के संबंध
मे कई गाथा प्रचलित है जो समय अंतराल के साथ और भी व्यापक
होती गई। प्राचीन समय में हमारे पुरोहित राजा और समाज के वरिष््ठजनों
को रक्षा सुत्र बांधा करते थे और जन कल्याण की अपेक्षा रखते थे।
रक्षा बंधन का त्योहार सावन की पूर्णिमा को मनाया जाता है चूंकि सावन का
महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और पूर्णिमा इस
माह का अंतिम दिन हैण् इसलिए इस दिन भगवान शिव को राखी
बांधने से वे बहुत प्रसन्न होते है और उनकी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद देते हैं
धार्मिक कथाओं के अनुसार रक्षाबंधन के पावन पर्व को मनाने की शुरुआत माता लक्ष्मी ने की थी।
सबसे पहले माता लक्ष्मी ने ही अपने भाई को राखी बांधी थी।
सनातन धर्म में कई जगह इसका उल्लेख मिलता है कि शिष्य अपने गुरूओं
को रक्षासूत्र बांधते थे और गुरू से अपने आध्यात्मिक उन्नति के लिए आशीर्वाद
प्राप्त करते थे।
मान्यता है कि हिंदू धर्म में देवताओं को भी राखी बांधने की परंपरा है मान्यता है कि देवताओं
को राखी बांधने से भगवान उनकी मनोकामना पूरी करते हैं।
सनातन धर्म में सबसे पहले गणेश जी को बांधी जाती है उसके पश्चात अपने
गुरू को राखी बांधी जाती है ।
रक्षा बंधन के दिन भगवान गणेश को लाल रंग की राखी बांधनी
चाहिए क्योंकि श्री गणेश जी को लाल रंग पसंद है मान्यता है कि ऐसा
करने से जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं तथा ऋद्धि.सिद्धि
की प्राप्ति होती है
इस दिन अपने पितरों आदि का तर्पण भी किया जाता है पिंडदान और
श्राद्ध के लिए पूर्णिमा की तिथि को शुभ माना गया है इस दिन
दान का भी विशेष महत्व बताया गया है
राखी बांधते समय पढ़ें ये मंत्र
श्ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।श्
राखी बांधने का मुहूर्त
राखी बांधने का समय सुबह 06.16 से शाम 05.30 बजे तक
राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर 01.40 से शाम 04.15 बजे तक
राखी वाले दिन भद्रा अंत का समय 06.15
कैसे बांधने की शास्त्रोक्त विधि:ः
थाली में रोली चंदन अक्षथ रक्षासूत्र रखे ।
घी का एक दीपक जलायें जिससे भाई की आरती करें।
रक्षा सूत्र और पूजा की थाली सबसे पहले भगवान गणेश को समर्पित करें।
इसके बाद भाई को उत्तर या पूर्व की तरफ मुंह करवाकर बैठाएं।
पहले भाई के माथे पर तिलक लगाएं फिर राखी बांधे और आरती करें।
इसके बाद मिठाई खिलाकर भाई की मंगल कामना करें।
रक्षासूत्र बांधने के समय भाई सर पर रूमाल और बहन का सर दुप्पटा या आंचल को रखना चाहिए
सर खुला नहीं होना चाहिए।
राखी खरीदते या बांधते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि टूटी हुई राखी
नही खरीदना चाहिए या राखी टूट जाती है तो उसे जोड कर नहीं बांधना
चाहिए क्योंकि शास्त्रों में खण्डित राखी को बांधना वर्जित माना गया है।
-- स्वामी श्रेयानन्द महाराज
Comments
Post a Comment