आओ साधना करे ...(भाग 4 )
आओ साधना करे ...(भाग 4 )
शक्ति पर्व :: नवरात्रि 2021
सनातन हिन्दू नव वर्ष ....नवरात्रि ....आने को है ।
धन्य है वे व्यक्ति जिन्होंने साधना मार्ग का आश्रय लिया । साधना ही जीवन की श्रेष्ठ विधा है । जिससे जीवन मे सफलता मिलने के साथ साथ अद्वितीय व्यक्तित्व का निर्माण होता है ।
इस भीषण करोना के महाकाल में जब शहरो में लोकडाउन लगा हुआ है आप घरो में है तो आइए इस समय का सदुपयोग हमारे ऋषियों के द्वारा अर्जित उस आध्यात्मि ज्ञान , चिंतन को हम जाने और उसे अपनाये ।
परम् सौभाग्य रहा जो मुझे
यह ज्ञान अपने सदगुरुदेव परमहंस स्वामी निखलेश्वरनन्द जी से प्राप्त हुआ था उसे मैं आप लोगो के साथ साझा कर रहा हूँ -
नवरात्रि की साधना 13 अप्रेल से प्रारम्भ होगी इसकी चर्चा हम आने वाले दिनों में करेंगे । अभी इन 5 दिनों में इसकी प्राम्भिक तैयारी करते हैं ....
1. सर्वप्रथम आप अपने बैठने के लिए एक स्थान सुनिश्चित कर ले जिसमे आप आराम से जमीन पर बैठ सकते हो । आसान स्वरूप नीचे कम्बल मोटा करके उस पर कोई स्वच्छ वस्त्र बिछा दे ।
2. आप अपनी सुविधानुसार प्रातः, शाम या रात्रि का समय सुनिश्चित कर ले जिस समय आपको बैठना है ।
3. आपको जो आरामदायक आसन लगे सुखासन या पद्मासन उस आसन में बैठ जाना है । हाथ सीधे घुटनो पर औऱ अंगुलियां ज्ञान मुद्रा ( अंगूठा अनामिका के निचले भाग में लगी हो) में लगी हो ।
4. आप सीधे बैठ जाये, पीठ सीधी हो झुककर न बैठे ।
5. अब आप नाक से 3 बार लम्बी स्वाश ले और छोड़े ।
6. इसके बाद अब एक लंबी स्वाश लें और ॐ का नाद (उच्चारण) धीमे आवाज में करे । जब तक स्वाश निकल न जाये तब तक ॐ का नाद करते रहना है । इस समय आपकी आंखें बंद रहेंगी और आपका ध्यान दोनो भोहों के मध्य (भृकुटि ) में रहेगी ।
फिर स्वाश ले और ॐ का नाद करे । इस प्रकार इसे तीन बार दोहराये ।
7. इसके बाद अब स्वाश ले पर मुह बन्द करके नाक की ध्वनि से ॐ का नाद (उच्चारण) धीमे आवाज में (जैसे भौरा गूँजन करता हैं ) करते रहना है .... स्वाश खत्म हो जाये तो पुनः स्वाश लेना है और ॐ का नाद धीमे आवाज करते जाना है । इस बीच आप आंखे बन्द रखेंगे और ध्यान भृकुटि में ही लगा रहेगा । हाथ सीधे और अंगुली ज्ञान या ध्यान मुद्रा में रखेंगे ।
8. जब आप इस ॐ के गूँजरन को करोगे तब मन मे कुछ भी विचार न लाये । यदि विचार आये तो उस विचार का पीछा न करे ।
9 आप गूँजरन के साथ यह विचार करे कि आप अंदर की ओर उतर रहे हैं बस और आप गूँजरन करते रहे ।
10. यदि इस क्रिया को आप बताये विधि से करे तो आपको पहले ही दिन से दिव्य अनुभूति होगी । अनुभति कैसी हुई आप स्वयं ही कमेंट्स में बताएंगे ।
11. इस क्रिया को आप 30 मिनट तक करना है । प्राम्भ में आप कुछ समय ही कर पाएंगे क्योंकि आपका प्रारब्ध अच्छे कार्य करने से रोकेगा ....पर आपको इसकी अवधि 30 मिनट पूरा करना ही है जो उसकी पूर्णता है ।
यह साधना जगत में प्रवेश का प्रथम द्वार है । इस प्रयोग को आप कीजिये ... जल्द ही नवरात्रि की साधना कैसे की जाय ... माता के आर्शीवाद से अपनी मनोकामना पूर्ण कैसे की जाय वह साधना विधि बताई जाएगी ।
जय गुरुदेव
सदैव आपके कल्याण की भावना लिए ...
- स्वामी श्रेयानन्द महाराज
( सनातन साधक परिवार )
Mob. 09752626564
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