शव से शिव बनने की महायात्रा:ः महाशिवरात्रि
शव से शिव बनने की महायात्रा:ः महाशिवरात्रि
सनातन परम्परा वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित है। हमारी परम्परा सौरमण्डल में होने वाले
आलोढन-विलोढन पर आधारित रहती है। महाशिवरा़ित्र की रात्रि को पृथ्वी पर एक विशेष उर्जा
का उध्र्वगमन होता है जो नीचे से उपर की यात्रा करती है। इंसान में यह यात्रा मूलाधार से
सहस्त्रार की ओर उर्जा की यात्रा प्रवाह है। इस रात्रि को उर्जा मनुष्य के शरीर में नीचे से उपर
उध्र्वगमन करती है । अतः हमारे ऋषियों ने इस रात्रि को हमे सोने से मना किया है क्योंकि
जब उर्जा नीचे से उपर की ओर उठती है तो उसका मार्ग अवरोध नही करना चाहिए। उर्जा
का यह प्रवाह जब अपने पूर्णता तक पहंुचती है (मूलाधार से सहस्रार तक ) तब उसका
ज्ञान चक्षु खुल जाता है, और इंसान एक सम्पूर्णता को प्राप्त करता है।
सम्पूर्णता का तात्पर्य - इंसान की सारी क्षमताएं जो उसके अन्दर उजागर हो सकती है,
जिसे वेदों में कहा है - पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात पूर्णमदुच्युते ।।
यही पूर्णता प्राप्त करने की यात्रा जब इंसान बिना ज्ञान के शव की भंाति जन्म से मृत्यु तक
की यात्रा करता है, इस बीच जब वह इस ज्ञान को आत्मसात करता है तो वह शव से शिव
बन जाता है जो यह सम्भव है महाशिवरात्रि की रात्रि ।
आईये इस शिवरात्रि को करते हैं आराधना ....
उस महाकाल की जिसके सामने काल भी नतमस्तक हैं ................
....................................................................................................................
कब करें महाकाल की उपासना:ः मुहूर्त:ः
वरामिहिर के कालचक्र की गणना के अनुसार इस वर्ष महाशिरात्रि का मुहूर्त दिनांक 11.03.2021
दिन गुरूवार को पड रहा है।
यंू तो महाकाल की उपासना के लिए समय की बाध्यता नहीं रहती पर कोइ भी साधना पूजा की
सफलता के लिए मुहूर्त का उपयोग करें तो उसकी सफलता निश्चित हो जाती है ।
इसका प्रारंभ 11 मार्च 2021 से दोपहर 2.39 से
और समापन दूसरे दिन 12 मार्च 2021 दिन 2.03 मिनट तक मुहूर्त है ।
....................................................................................................................
मंत्र:ः ओम नमः शिवाय
का जप सभी का करना चाहिए। यदि सम्भव हो तो दिये जा रहे राशि अनुसार जातक
अपने अपने राशि अनुसार मंत्र का जप कर सकता है ‘
मेष :ः ओम ममलेश्वराय नमः ।।
वृषभ:ः ओम नागेश्वराय नमः ।।
मिथुन:ः ओम भुतेश्वराय नमः ।।
कर्क:ः महादेव के द्वादश नाम का स्मरण करें।
सिंह:ः ओम नमः शिवाय ।
कन्या:ः शिव चालीसा का पाठ करे।
तुला :ः शिवाष्टक का पाठ करें ।
वृश्चिक:ः ओम अन्गारेश्वाय नमः ।
धनु:ः ओम समेश्वराय नमः ।
मकर:ः सहस्त्रनाम पाठ करें ।
कुंभ:ः ओम शिवाय नमः ।
मीन :ः ओम भामेश्वराय नमः ।
.......................................................................................
क्यों करें महाकाल की पूजा आराधना:ः
1. सुख समृद्धि शंाति की प्राप्ति के लिए ।
2. मनचाहा वर की प्राप्ति के लिए ।
3. तंत्र बाधा से निवारण के लिए ।
4. भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्ति के लिए ।
....................................................................................................................
कौन कर सकता है महाकाल की पूजा:ः
1. महाकाल की पूजा सभी कर सकते हैं इसमें किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नही होता है
2. जो जिस मनोकामना से इसकी पूजा करता है उसका फल भगवान उसे देते ही है इसका
शास्त्रों में वर्णन भी आया है ।
3. महाकाल की पूजा के लिए यदि आप किसी गुरू से दीक्षित हो और पूजा साधना करते है
तो आपके पूजा का फल आपको तत्काल ही मिलता है। यदि आपने किसी को गुरू नही
बनाया है तो महाकाल को ही अपना गुरू मानकर संकल्प लेकर पूजा आराधना साधना करें
तो भी आपकी पूजा साधना सफल होती ही है।
4. स्त्रियों को पीरेड के दिनो में पूजा उपासना वर्जित माना गया है ।
....................................................................................................................
कैसे करे महाकाल की पूजा:ः
1. महाकाल की पूजा का विशेष फल प्राप्ति के लिए देवालयों में जाकर पूजन करने का प्रावधन
है। यदि सम्भव न हो तो घर पर ही पूजन कर सकते हैं ।
2. यदि इस दिन पारस से निर्मित शिव लिंग की पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है तो
शास्त्रों में वर्णन है इस पूजन का फल सहस्त्रों गुना फल की प्राप्ति होती है।
3. सर्वप्रथम प्रातःकाल उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर महादेव
की पूजा आराधना, अभिषेक करना चाहिए।
4. शिवाष्टक पाठ करना चाहिए ।
5. रात्रि को शिव तांण्डव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए । और सम्भव हो तो रात्रि में रामायण का पाठ
शिवजी के सामने कर चाहिए क्योंकि शिव जी को रामायण पाठ का श्रवण करने में बहुत ही
आनन्द आता है।
6. इस रात्रि को निद्रा का त्याग करना चाहिए और पूरी रात्रि अपने मेरूदण्ड को सीधे रखना
चाहिए जिससे उर्जा प्रवाह का लाभ इसंान को मिल सके।
7. यदि सम्भव हो तो इस दिन उपवास करना चाहिए।
....................................................................................................................
शिव जी पूजा में उपयुक्त की जाने वाली सामग्री:ः
शिव जी की पूजा में समी के पत्ते, सुगंधित पुष्प, तीन मुखी बेल पत्र, एक मुखी रूद्राक्ष, धतूरा के फूल, जौ की बाल,
दूध, दही, शहद, शक्कर, पंचामृत, गुलाल, भंाग, शुद्ध जल, अनार के रस से और ऋृतु फल से
शिव जी की पूजा करना चाहिए ।
....................................................................................................................
पूजा में वर्जित सामग्री :ः
शिव जी की पूजा में कभी भी टूटे अक्षत, तुलसी के पत्ते , कंुकुम, केकती के फूल का उपयोग
वर्जित माना गया है । नारियल के पानी से भी शिवलिंग का अभिष्ंोक नही करना चाहिए ।
शिव पूजन में शंख का उपयोग शास्त्रों मे वर्णित कथाओ के अनुसार वर्जित माना गया है।
....................................................................................................................
महाशिव रात्रि को क्या करें:ः
1. इस दिन तिल और घी का दान करने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ।
2. बेल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाने से सभी मनोकामना की पूर्ति होती है ।
3. शिव लिंग में जल में केशर मिलाकर चढाने से विवाह बाधा दूर होती है।
4. शिवलिंग में जल चढाते समय शिव लिंग को रगढना चाहिए जिससे दुर्भाग्य दूर होता है।
5. इस रात्रि को सोना नहीं चाहिए ।
6. ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करते रहना चाहिए।
....................................................................................................................
महाशिव रात्रि को क्या न करें:ः
1. वाद विवाद न करें।
2. आलस न करें ।
3. बाल व नाखून न काटे।
4. व्यर्थ बात कर समय नष्ट न करे।
5. काम क्रीडा न करें ।
भगवान शिव आपकी सभी मनोकामना पूर्ण करें
इसी मंगलकामना के साथ ...
सदैव आपके साथ
स्वामी श्रेयानन्द महाराज
(सनातन साधक परिवार )
Comments
Post a Comment