होगी धन, यश मान प्रतिष्ठा में वृद्धि होगा दुःखो का अंत - स्वामी श्रेयानन्द महाराज
बसंत पंचमी:ः सरस्वती पूजा 16 फरवरी 2021 बुधवार
मानव जीवन दुःखों परेशानियों और बाधाओं अडचनों से भरा हुआ है हमें जीवन में कुछ सुख
और सफलता मिलना चाहिए थी जो आनन्द मिलना चाहिए थी वह हम नहीं मिल पाता जबकि
हम धन, पद और प्रभुता के लिए निरंन्तर जरूरत से ज्यादा परिश्रम करते हैं इसके बाद भी
हमें अनुकूलता प्राप्त नहीं होती इसका कारण यह है कि व्यक्ति उन्नति तभी कर सकता है
जब उसके पास दैविक शक्ति हो..... साधनाओ का बल हो ..... दैविक शक्ति की सहायता
से ही व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण उन्नति और सफलता प्राप्त कर सकता है ।
महाभारत काल में भी अर्जुन को युद्ध में विजय प्राप्त करने की इच्छा हुई तो भगवान कृष्ण ने
उन्हें सलाह दी कि यदि तुम्हें युद्ध में विजय हासिल करना है तो दिव्य अस्त्रांें की प्राप्ति के
लिए शिव और इन्द्र की आराधना कर दिव्यास्त्र प्राप्त करो तभी युद्ध जीत सकते हो ।
इसी प्रकार हम अपने जीवन में निरंतर युद्ध लडते रहते हैं पर जिस प्रकार विजय हासिल
होना चाहिए नही हो पाता... जीवन का युद्ध हम बाहुबल से लड रहे है.... जबकि हमारे पास
दैविक शक्ति होना चाहिए..... साधना शक्ति होनी चाहिए... यदि हम गुरू के ज्ञान के माध्यम
से उनके आशीर्वाद से साधनाओं के माध्यम से दैविक शक्ति प्राप्त कर लेते हैं तो ज्यादा
अनुकूल सफलतादायक और संपूर्ण जीवन में जगमगाहट प्राप्त हो सकती है ।
बसंत पंचमी में सरस्वती पूजा क्यों करे ?
हर सुंदर गुण आपके जीवन में समा जाएं तो आपको
सरस्वती साधना सिद्धि अवश्य ही करनी चाहिए।
बसंत पंचमी का आगमन जीवन में दुःखों का अन्त करता है, जीवन मे नीरसता
की जगह चैतन्यता सजीवता का आगमन होता है और यह जीवन में बने
रहे इसके लिए बंसत पंचमी को पूरे परिवार के साथ सरस्वती साधना सम्पन्न
करना ही चाहिए।
वही व्यक्ति जीवन में सफल होता है जिसकी स्मरण शक्ति तीव्र हो, जिसमंे
नेतृत्व की क्षमता हो, अपने बातों से दूसरों पर प्रभाव डाल सके, नौकरी, व्यापार या
इन्टव्यू में सफलता प्राप्त करे, संतान परीक्षा में अच्छे नम्बर प्राप्त करे उसे
सरस्वती साधना करना ही चाहिए,
जब उसे बालने की कला का ज्ञान हो जायेगा तो वह दूसरों को प्रभावित कर सकेगा
और अपने व्यापार को समृद्ध बना सकेगा जिससे लक्ष्मी का आगमन बनेगा और
वह जीवन में आर्थिक उन्नति कर सकेगा ।
सरस्वती साधना के माध्यम से जीवन को अद्वितीय और अनुपम बनाया जा
सकता है। ये तो गुरू ही स्पष्ट कर सकतें है कि किस प्रकार जीवन का
निर्माण किया जाय। और जहां सरस्वती का वास होता है वहां लक्ष्मी का
आगमन होता ही है। साधना के लिए उम्र की बाध्यता नही होती जहां 5 वर्ष
को बालक साधना कर सकता है वहीं 80 वर्ष का वृद्ध भी सरस्वती साधना
कर दैविय शक्ति प्राप्त कर जीवन में मान सम्मान, यश, प्रतिष््ठा प्राप्त कर
सकता है।
गुरू दीक्षा कैसे लें ???
यदि आप स्वयं गुरू के पास जा कर दीक्षा ले सकते हैं तो अति उत्तम माना गया है यदि
आप नही जा सकते हैं तो दीक्षा के लिए अपने वर्तमान फोटो जो सीधा खीचा हो इस चित्र
में आंखें पूरी तरह खुली हुई हो उसे इस व्हाटशप नंम्बर 9752626564 में भेज कर भी
दीक्षा लिया जा सकता है इसका भी उतना ही लाभ होता है जितना गुरू के समक्ष प्रत्यक्ष
उपस्थिति का होता है।
बसंत पंचमी को क्या करें ??
सर्वप्रथम वह समर्थ गुरू से दीक्षा ले जिस गुरू को इस साधना का ज्ञान हो, उससे
विनय करके पहले गुरू दीक्षा ले उसके पश्चात गुरू से दीक्षा लेकर बताये
हुए साधना मार्ग मे चले तभी साधक केा दैविय शक्ति की कृपा प्राप्त होती है।
साधना विधान
1. सरस्वती साधना माह के किसी भी पुष्य नक्ष़़़़़़त्र से शुरू की जा सकती है। बसंत पंचमी को
इस साधना को अवश्य करना चाहिए जिससे पूरे वर्ष के लिए आपका जीवन आनन्द युक्त
व्यतीत हो । साधना के पूर्व साधक को गुरू से आज्ञा अवश्य ले लेनी चाहिए। और
2. सर्वप्रथम संक्षिप्त गुरू पूजन करें ।
3. शुभ मुहूर्त में स्वच्छ स्थान घर, मंदिर या एकांत में बैठ के पूर्व या उत्तर दिशा की ओर
मुख करके सफेद आसन में सफेद धोती पहन कर बैठ कर मं़त्र जप करना चाहिए।
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4. सामने सरस्वती देवी की सुन्दर प्रतिमा या चित्र स्थापित करें । सामने तांबे के थाली में
कंुकुम, अक्षत और श्वेत पुष्प रखना चाहिए।
5. सामने बाजोट में देवी के चित्र के सामने चेतना युक्त मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित सरस्वती
यंत्र स्थापित करना चाहिए । और घी का दीपक जलाकर अगरबत्ती जला दे।
6. सरस्वती देवी फोटो और मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठित सरस्वती यंत्र की संक्षिप्त पूजन करें और
दूध से बना हुआ नैवेद्य भोग अर्पित करें ।
7. इसके पश्चात साधक चैतन्य स्फटिक माला से दिये मंत्र की 21 माला जप सम्पन्न करें। यह
11 दिन की साधना है नित्य एक ही समय में माला जप करे।
मंत्र:ः ऐं ऐें ऐं वागदेवी ऐं ऐं ऐं नमः ।।
8. मंत्र जप के पश्चात माला को साधक को धारण कर लेना चाहिए जिससे उसका प्रभाव
साधक को मिलता रहे।
9. इसके पश्चात पुनः संक्षिप्त गुरू पूजन करें। साधना की सफलता के लिए साधना की समाप्ति
के बाद गुरू पूजन करना चाहिए ।
(अधिक जानकारी के लिए स्वामी श्रेयानन्द जी से मो. 09752626564 पर सम्पर्क कर सकते हैं )
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